धुमधाम से मनाया गया मां विपत्तारीणी की पूजा

ईचागढ़ - सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के डुमरा,तामारी,टीकर, ईचागढ़, सोड़ो ,कुंदरीलोंग व आदारडीह चोगा में मंगलवार को मां बीपद तारणी का पूजा विधि विधान से किया गया। आदिशक्ति मां दुर्गा की विपत्तारणी रूप की महिलाओं ने पूजा अर्चना कर अपने बच्चों की हर विपदा से रक्षा व दीर्घायु का कामना किया। पंडितों द्वारा पूजा अर्चना कर व्रतीयों को पुष्पांजलि अर्पित कराया गया। डुमरा गांव में मां विपत्तारीणी मंदिर में सुबह से ही महिलाओं का कतार देखा गया। दुर दराज के हजारों श्रद्धालु माता की पूजा कराने व मन्नतें मांगने के लिए पहुंचे। ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में एकमात्र विपत्तारीणी मंदिर में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। 

बताया जाता है कि माता भगवती की उपासना करने से हर विपत्ती, आपदा से माता रक्षा करती है। विपत्तारीणी पूजा में अनारस का भोग के साथ 13 प्रकार के फल ,मुल ,कंद का भोग लगाया जाता है। पुड़ी पलाव सहित कई व्यंजनों से माता भगवती विपत्तारीणी का पूजा अर्चना किया जाता है। पूजा अर्चना के बाद व्रत कथा का श्रवण कर घर आकर मां अपने बच्चों के हाथ में लाल रेशमी धागा बांध कर माता भगवती से रक्षा करने का कामना के साथ व्रत तोड़ती है। वहीं श्रद्धालु मुकेश कुमार गोस्वामी ने बताया कि आज माता विपत्तारीणी पूजा धुमधाम से किया गया। 

मंदिर में हजारों श्रद्धालु माता रानी की पूजा के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि मां अपने बच्चों को हर संकट से रक्षा के लिए विपदा से तारण करने वाली मां विपत्तारीणी का पूजा करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे यहां डुमरा गांव में इस क्षेत्र का एक मात्र मंदिर है, जहां मां विपत्तारीणी का मुर्ती स्थापित है और कृष्ण चन्द्र लायेक द्वारा पूजा अर्चना किया जाता है। यहां हर मनोकामना के लिए लोग दुर दराज से आते है और मन्नतें मांगते हैं। उन्होंने कहा कि यहां लोगों का मन्नतें पूरी होता है और लोग आकर भोग साड़ी,फल मुल चड़ाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा ईचागढ़, टीकर,तामारी,सोड़ो ,आदारडीह चोगा , कुंदरीलोंग सहित कई दूर्गा मंदिरों में भी मां विपत्तारीणी की पूजा किया गया।
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